S.P. MITTAL Blog

अजमेर में साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकलेगा ईद मिलादुन्नबी का जुलूस। 25 अगस्त को निकलने वाले जुलूस में सभी धर्मों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। ================ प्रतिवर्ष निकलने वाले ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इस बार 25 अगस्त को साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकाला जाएगा। जुलूस की तैयारियों को सूफी इंटरनेशनल संस्था की ओर से 26 जुलाई को ख्वाजा साहब की दरगाह स्थित अकबरी मस्जिद में एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्ष खादिमों की संस्था अंजुमन मोइनिया फखरिया चिश्तिया के सचिव सैय्यद कलीमुद्दीन चिश्ती ने की। बैठक में जुलूस के सफल संचालन, मार्ग व्यवस्था, अनुशासन, स्वच्छता, सुरक्षा तथा सामाजिक समरसता जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सूफी इंटरनेशनल के सचिव नवाब हिदायतउल्ला ने बताया कि जुलूस में शामिल होने वाले सभी लोग प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। जुलूस के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, यातायात व्यवस्था में सहयोग किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही सभी से अपील की गई कि जुलूस की गरिमा बनाए रखें और ऐसा कोई कार्य न करें जिससे समाज में गलत संदेश जाए। बैठक में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि अजमेर हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब और कौमी एकता की मिसाल रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जुलूस में विभिन्न धर्मों एवं समाजों के प्रतिनिधियों को भी सम्मान आमंत्रित किया जाएगा, ताकि पैगंबर-ए-इस्लाम के अमन और इंसानियत के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि इस वर्ष का 1501 वां जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पूरी शान, अकीदत और शहरवासियों के लिए भाईचारे सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर निकलेगा। अंत में सभी समाजों, संगठनों और शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में शामिल होकर पैगंबर ए इस्लाम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा प्रेम, शांति और इंसानियत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। बैठक में सूफी इंटरनेशनल के अध्यक्ष हाजी सरवर सिद्दीकी,मौलाना अय्यूब कासमी, दरगाह कमेटी के सहायक नाजिम शादाब अहमद, काजी मुनव्वर अली, अनजुमन सदस्य गफ्फार काजमी,एहतेशाम चिश्ती, अब्दुल नईम खान, सैय्यद फ़ज़ले अमीन चिश्ती, हाजी इफ्तेखार चिश्ती,पूर्व पार्षद मुख्तार अहमद नवाब, मोहम्मद शाकिर खान, अहसान सुलतानी, सैय्यद अनवर चिश्ती,सैय्यद मसूद मोईनी, अहसान मिर्ज़ा, हुमायूं खान, सलीम कुरैशी, हाजी रईस कुरैशी, आरिफ हुसैन, बशीर खान कायम खानी , सैय्यद सलीम बना,सैय्यद गुलज़ार चिश्ती, अब्दुल जब्बार अब्बासी, अकबर घोसी,शेखजादा ज़ीशान चिश्ती,उमरदीन अब्बासी, अब्दुल शाहिद, अब्दुल हमीद, एस एम अकबर,बदरुद्दीन कुरैशी , हाफिज खान,अब्दुल सलाम,सुब्हानी, मोहम्मद इस्लाम, अशरफ अली, अब्दुल अजीज मुल्तानी,आइन हुसैन घोसी, साहिल घोसी, इकबाल कुरैशी, अस्नान कुरैशी,गयासुद्दीन चिश्ती, अल्ताफ ऊंटडा, जाहिद खान ,उस्मान घड़ियाली बिलाल, हाफिज रमजान शेरानी, अल्ताफ हुसैन अंसारी, आदि मौजूद रहे जुलूस के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413383786 पर नवाब हिदायतउल्ला से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

विवाह जीवन में अनुशासन लाता है-मोहन भागवत, संघ प्रमुख। पुत्री हो तो परिवार में अनुशासन और बढ़ जाता है। सनातन संस्कृति में तो कन्यादान करने वाले माता-पिता को मोक्ष मिलने की मान्यता है। ================ 26 जुलाई को हैदराबाद में आयोजित विश्व मंगल्य सभा के समकालीन मातृत्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विवाह जीवन में अनुशासन लाता है और धर्म व जिम्मेदारी का भाव पैदा करता है। इसके विपरीत लिव इन रिश्तों में लोग जिम्मेदारी से बचकर केवल सुख चाहते हैं। लिव इन रिश्तों के दुष्परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है। पश्चिमी संस्कृति की अंधी नकल आधुनिकता नहीं बल्कि समाज का पतन है। संघ प्रमुख ने भारत की सनातन संस्कृति में विवाह पद्धति के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज पश्चिम संस्कृति के पक्षधर लोग भी भारत की विवाह पद्धति की सराहना करने लगे है। यही वजह है कि रोजगार के लिए विदेश में गई भारतीय युवतियों को पश्चिमी देशों के युवा सनातन संस्कृति के अनुरूप विवाह कर रहे है। यानी भारत की विवाह पद्धति को दुनिया में स्वीकारा जा रहा है। सनातन संस्कृति के अनुरूप संपन्न विवाह के बाद जिस परिवार में पुत्री का जन्म होता है, वह परिवार और अनुशासित हो जाता है। पुत्री को देखते हुए माता पिता को भी अपनी जिम्मेदारी का ज्यादा अहसास होता है। हालांकि पुत्री के जन्म का फैसला सनातन संस्कृति में ईश्वर का माना जाता है। लेकिन हम यदि सिर्फ पुत्रों वाले परिवारों की तुलना पुत्री वाले परिवार से करे तो दोनों में फर्क नजर आएगा। यह भी देखा गया है कि पुत्री वाला परिवार ज्यादा सफलता और सरलता के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। सनातन संस्कृति में तो मान्यता है कि कन्यादान करने वाले माता पिता को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हमारी संस्कृति में मोक्ष का बहुत महत्व है। कई बार मोक्ष प्राप्ति के लिए मनुष्य को अनेक जतन करने होते है, जबकि कन्यादान करने वाले माता पिता को सरलता के साथ मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। वो परिवार वाकई भाग्यशाली है जिनके यहां पुत्री का जन्म हुआ है । S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में पीएम मोदी को गालियां। भद्दी गालियां बकने में लड़कियां भी शामिल। गालियों वाले वीडियो को सोशल मीडिया के प्लेट फार्मों से हटाने के निर्देश। सवाल-आखिर यह कौन सा मीडिया है? क्या राहुल-अखिलेश ऐसे मीडिया की निंदा करेंगे। ================ नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी ने एक से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया उसमें अनेक प्रदर्शनकारियों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियां दी। गालियां बकने में लड़कियां भी शामिल रही। अश्लील और भद्दी गालियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों से ऐसे वीडियो को हटाने के निर्देश संबंधित संस्थाओं को दिए हैं। अब भी गालियों वाले वीडियो सोशल मीडिया से हट जाए, लेकिन यह वीडियो देश भर में घर घर तक पहुंच गए है। हर व्यक्ति के मोबाइल में गालियों वाला वीडियो है। चिंताजनक बात तो यह है कि जिन व्यक्तियों ने वीडियो नहीं देखा उसे भी ऐसे वीडियो दिखाए जा रहे है। मर्यादाओं के कारण प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसी गालियां का उल्लेख न हुआ हो, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से देश के 140 करोड़ लोगों तक यह वीडियो पहुंच चुका है। सवाल उठता है कि आखिर यह कौन सा मीडिया है जो देश के प्रधानमंत्री के लिए बकी गालियों को लोगों तक पहुंचा रहा है? सवाल ऐसे मीडिया पर नियंत्रण का नहीं है, बल्कि मर्यादा और नैतिकता का है। कोई लड़की मां बहन की गालियां बकने और फिर उस लड़की का वीडियो देशभर में वायरल हो तो यह हमारी सनातन संस्कृति के विरुद्ध भी है। सनातन संस्कृति में तो लड़की को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्र में तो कन्या पूजन की परंपरा है। सनातन धर्म को मानने वाले नवरात्र में कन्याओं की पूजा करते हैं और उन्हें देवी का स्वरूप मानकर आशीर्वाद लेते है। सवाल उठता है कि कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में शामिल जिन लड़कियों ने पीएम मोदी को गालियां दी उन्हें सनातन संस्कृति में क्या माना जाए? भले ही देश विरोधी विचारधारा वाले लोग ऐसी गालियों को विचारों की स्वतंत्रता माने, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति में गालियां बकने वाली लड़कियों का कोई स्थान नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या कॉकरोच पार्टी की समर्थक कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव गालियां बकने वाली लड़कियों और वीडियो को प्रसारित करने वाले मीडिया की निंदा करेंगे? राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की कार्यवाही को तो प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उन तत्वों की निंदा नहीं करते जो देश के प्रधानमंत्री को गालियां दे रहे है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव माने या नहीं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री को गालियां देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। सरकार को ऐसे मीडिया को नियंत्रित करने की जरूरत है जो देश विरोधी ताकतों के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है। कॉकरोच पार्टी के नेताओं को भी उन तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए, जिन्होंने देश के प्रधानमंत्री को गालियां दी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मोदी जी! आखिर कब तक देश विरोधी तत्वों से भारत को बचाओगे? सवाल छात्र आंदोलन का नहीं, बल्कि हर ऐसे आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता का है। नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। री-नीट के रिजल्ट के बाद आंदोलन का क्या तुक था? जसवंत दारा का सटीक और प्रभावी कार्टून। ================ 25 जुलाई को दोपहर बाद जब धर्मेन्द्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, तभी से मीडिया में प्रसारित हो रहा है, यह छात्रों और देश के युवाओं की जीत है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घमंड के साथ कहा, हमने मोदी सरकार को झुका दिया। इसमें कोई दो राय नहीं कि छात्रों और युवाओं के देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह आंदोलन सिर्फ छात्रों और युवाओं का था? दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि जंतर मंतर के आंदोलन में देश विरोधी तत्व भी शामिल हो गए थे। आदतन अपराधियों ने भी स्टूडेंट का चोला ओढ़ लिया था। यही वजह रही कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जबरदस्त हिंसा हुई। दिल्ली की तरह यह आंदोलन देश भर में फैल गया और जगह जगह हिंसा होने लगी। सरकार भी मानती है कि इस हिंसा में युवाओं का कोई योगदान नहीं है, लेकिन आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता से आंदोलन हिंसक हुआ। यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसे आंदोलन में हिंसा हुई। इससे पहले सीएए (नागरिकता संशोधन कानून), किसान आंदोलन आदि के दौरान भी देश विरोधी तत्वों की सक्रियता देखने को मिली थी। किसान आंदोलन में तो सरकार को संसद में पारित कानूनों को वापस लेना पड़ा था। ताजा छात्र आंदोलन को देखते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने जो इस्तीफा दिया उसमें भी यह लिखा है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर पर फोकस करें, इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हंू। धर्मेन्द्र प्रधान का यह कथन बताता है कि छात्र आंदोलन के नाम पर देश के हालात बिगाड़ने की साजिश हो रही थी। इसलिए सवाल उठता है कि आखिर देश विरोधी ताकतों से भारत को कब तक बचाया जाएगा। हर बार देश विरोधी ताकतें ज्यादा शक्ति के साथ भारत पर हमला करती हैं। यह कहा जा सकता है कि भारत में देश विरोधी ताकतें लगातार मजबूत हो रही है। ऐसी ताकतें सिर्फ मौके का इंतजार करती है। ऐसे आंदोलनों में जिस तरह पीएम मोदी को गालियां दी जाती है उससे भी जाहिर है कि देश विरोधी ताकतें अपने मंसूबों में मोदी को सबसे बड़ा बाधक मानती है। यानी जब तक मोदी की सत्ता रहेगी, तब तक देश विरोधी ताकतों को भारत को तोडऩे का अवसर नहीं मिलेगा। यही वजह है कि ऐसे आंदोलनों में सीधे मोदी को ही टारगेट किया जाता है। धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा करवाकर पीएम मोदी ने सिर्फ अराजकता के माहौल को टाला है। देश में राष्ट्रविरोधी ताकतें कभी भी हालातों को बिगाड़ सकती है। यदि धर्मेन्द्र प्रधान को नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। नीट यूजी की परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी। परीक्षा होने के साथ ही पेपर लीक की खबरें आ गई थी, लेकिन तब प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिा। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही 21 जून को दुबारा से परीक्षा हुई और 16 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिया गया। यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने जुलाई माह में जो आंदोलन शुरू किया उसमें नीट यूजी पेपर लीक का तो कोई मुद्दा नहीं था। विपक्ष के नेता अब भले ही धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय ले, लेकिन मई में पेपर लीक के समय कोई भी राजनीतिक दल सरकार के खिलाफ आंदोलन को खड़ा नहीं कर सका। जुलाई में आंदोलन तब शुरू हुआ, जब कॉकरोच पार्टी के संस्थापक दीपके अमेरिका से भारत आए। यानी विदेश से आकर एक व्यक्ति ने देशभर में आंदोलन को खड़ा किया। जिस तरह से नीट पेपर लीक पर अब आंदोलन किया गया उसकी जांच होगी तो देश विरोधी ताकतों के चेहरे पर से नकाब भी उतर जाएगी। संसद में चर्चा हो: नीट पेपर लीक और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। ताकि देशवासियों को आंदोलन की हकीकत का पता चल सके। अच्छा हो कि इस चर्चा में विपक्ष भी भाग लें। सरकार की ओर से सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस संशोधित प्रस्ताव में ही आंदोलन पर चर्चा होनी चाहिए। दारा का कार्टून: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों के आंदोलन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका को लेकर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक और प्रभावी कार्टून बनाया है। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए कीटों की श्रेणी वाले कॉकरोचों (दीमक) से भी सरकार को वार्ता करनी पड़ रही है। यह दुखद है कि राजनीतिक स्वार्थों के खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। भारत के युवाओं को स्वयं को कॉकरोच नहीं बनने देना चाहिए। ================ जीव विज्ञान में कॉकरोच को तिलचट्टा भी कहा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व में तिलचट्टा प्रजातियों की 4600 किस्म है। इनमें से 30 प्रजातियां मानव बसेरों में पाई जाती है। कॉकरोच यानी तिलचट्टा की श्रेणी में दीमक भी शामिल है। दीमक से होने वाले नुकसान के बारे में हर इंसान अच्छी तरह जनता है। जिस घर में एक बार दीमक लग जाए उस घर को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। कई घरों में तो दीमक को मारने के लिए हर वर्ष जहरीली दवाई का छिड़काव करना पड़ता है। कॉकरोच और दीमक इतनी घातक होने के बाद भी विदेशी मानसिकता वाले कुछ भारतीय युवकां ने अपने राजनीतिक दल का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रख लिया है। भारत के लिए यह चिंताजनक बात है कि कॉकरोच की मानसिकता वाले युवकों के बहकावे में देश के अनेक युवा भी आ गए है। चूंकि भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए सरकार को कॉकरोचों से भी वार्ता करनी पड़ रही है। इसे दुखद ही कहा जाएगा कि राजनीतिक स्वार्थों की खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। बड़ी अजीब बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कॉकरोच पार्टी पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। वह भी तब जब लीक हुआ नीट का पेपर दोबारा से शांतिपूर्ण तरीके से हो गया है और परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारियां कर रहे हैं। यानी नीट का जो मुद्दा समाप्त हो गया उसे कॉकरोच की मानसिकता वाले कुछ युवा अब उठा रहे हैं। सब जानते हैं कि कॉकरोच पार्टी का संस्थापक अमेरिका में रह रहा भारतीय मूल का अभिजीत दीपके है। अमेरिका में समय समय पर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती है। जग जाहिर है कि अभिजीत दीपके को भी अमेरिकी भारत विरोधी संस्थाओं का सहयोग है, लेकिन इसके बाद भी भारत में कॉकरोच पार्टी ने आंदोलन शुरू कर दिया। गंभीर बात तो यह है कि इस पार्टी के प्रतिनिधि सरकार से आदेशात्मक भाषा में वार्ता कर रहे हैं। 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र प्रसाद से जो वार्ता हुई उसमें दो कॉकरोच सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आदेश दिया कि सरकार सबसे पहले धर्मेन्द्र प्रधान से शिक्षा मंत्री के पद से हटाए। प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग विपक्षी दल लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के दबाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से नहीं हटाया। सवाल उठता है कि क्या कुछ कॉकरोचों की मांग पर प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटा दिया जाएगा? असल में नीट पेपर लीक तो बहाना है। असल मकसद धर्मेन्द्र प्रधान की आड़ में भारत की नई शिक्षा नीति को कमजोर करना है। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही नई नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। जो इतिहास भारत को कमजोर दिखता था, उस इतिहास में भी प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते ऐतिहासिक बदलाव किए गए। भारत के स्व: को पुनर्जागरण करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेशी मानसिकता वाले कॉकरोच नहीं चाहते कि भारत में स्व: को पुनर्जीवित किया जाए। युवा बचे: भारत के युवाओं को कॉकरोच मानसिकता से बचना चाहिए। भारत के युवाओं को यह समझना चाहिए कि मौजूदा समय में युद्ध की विभीषिका से दुनिया भर के देश परेशान है। इतने बुरे दौर में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा है। ऐसे में युवाओं को ऐसा कोई कृत्य नहीं करना चाहिए जिससे देश कमजोर हो। युवाओं को लेकर पीएम मोदी कितने संवेदनशील है, इसका ताजा उदाहरण 23 जुलाई की रात 12 बजे वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। युवाओं को प्रधानमंत्री के इस वीडियो संदेश के सार को समझना चाहिए। पीएम मोदी की नीतियों की वजह से ही भारत के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं, वहीं भारत में भी स्टार्ट एप के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। आज लाखों युवक वर्क फार्म होम सिस्टम से घर बैठे प्रतिमाह लाखों रुपए का वेतन ले रहे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पेपर लीक पर पोल खुल जाएगी, इसलिए कांग्रेस संसद में चर्चा नहीं होने दे रही। राजस्थान में रीट का पेपर लीक होने पर डोटासरा ने कहा था कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दें? ================ नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष 20 जुलाई से संसद में हंगामा कर रहा है। सरकार की ओर से बार बार आग्रह किया जा रहा है कि पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी कहा है कि विपक्ष के नेता जितने समय के लिए चाहे उतने समय तक पेपर लीक पर चर्चा करवाने को तैयार है। लेकिन इसके बाद भी संसद के दोनों सदनों में पेपर लीक पर चर्चा नहीं हो रही है। असल में कांग्रेस को पता है कि यदि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। कांग्रेस ने खासकर राहुल गांधी ने पेपर लीक को लेकर जो मांगे सरकार के समक्ष रखी है, उनकी हवा चर्चा के दौरान निकल जाएगी। असल में राजस्थान में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2018 से 2023 के बीच 19 परीक्षाओं के पेपर आउट हुए। बार बार पेपर लीक की घटनाओं पर गहलोत ने कहा था कि पेपर लीक को रोकना अकेले किसी सरकार के बस में नहीं है, क्योंकि इसमें संगठित गिरोह शामिल है। तब गहलोत ने इसे देशव्यापी समस्या बताया था। पेपर लीक पर गहलोत ने जो कुछ कहा उसे भाजपा के सांसद संसद में चर्चा के दौरान बताएंगे और जब गहलोत के कथन एक एक कर बताए जाएंगे तो कांग्रेस की मौजूदा मांगों की हवा निकल जाएगी। कांग्रेस अभी नीट पेपर लीक पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा भी मांग रही है। लेकिन राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा जब कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री थे, तब शिक्षक पात्रता परीक्षा रीट का पेपर लीक हुआ। तब 20 लाख से ज्यादा युवाओं को दोबारा से परीक्षा देनी पड़ी थी। तब शिक्षा मंत्री के नाते डोटासरा से इस्तीफे की मांग की गई, लेकिन तब डोटासरा ने कहा कि रीट का पेपर लीक होने पर शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दे? परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की है। यानी तब कांग्रेस ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को खारिज कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आज नीट पेपर लीक पर कांग्रेस किस मुंह से शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रही है? संसद में चर्चा के दौरान भाजपा के सांसद डोटासरा के कथन का भी उल्लेख करेंगे। इतना ही नहीं संसद में चर्चा के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के बयानों को भी पढ़ा जाएगा। पायलट, गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम थे और तब उन्होंने पेपर लीक पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। पायलट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग में सीएम गहलोत द्वारा की गई सदस्यों की नियुक्ति पर भी ऐतराज जताया था। इतना ही नहीं अपनी ही सरकार के खिलाफ पायलट ने अजमेर से जयपुर तक पद यात्रा भी निकाली। संसद को यह भी बताया जाएगा कि कि गहलोत द्वारा आयोग में नियुक्त सदस्य बाबूलाल कटारा तो स्वयं ही परीक्षा के प्रश्न पत्रों को बेचने का काम कर रहा था। कटारा अभी जेल में है तथा गहलोत द्वारा नियुक्त दो महिला सदस्य श्रीमती संगीता आर्य और श्रीमती मंजू शर्मा आरोपों के बाद इस्तीफा दे चुकी है। संसद को यह भी बताया जाएगा कि आयोग में एक सदस्य की नियुक्ति के बाद अशोक गहलोत को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी थी। तब गहलोत ने कहा था कि मुझे इस सदस्य की पृष्ठभूमि पता होती तो मैं नियुक्ति नहीं करता। कांग्रेस को पता है कि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो गहलोत और डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

कांग्रेस के बंद और भाजपा के सफाई अभियान से क्या अजमेर के आनासागर के हालात सुधर जाएंगे? ================ अजमेर में कांग्रेस के नेता गौरवान्वित है कि उन्होंने आनासागर की दुर्दशा के मुद्दे पर 23 जुलाई को अजमेर बंद करवा दिया। वहीं भाजपा के नेता इसलिए गौरवान्वित है कि उन्होंने 22 से 24 जुलाई तक तीन दिवसीय सफाई अभियान चलाकर आनासागर को स्वच्छ बना दिया। यानी दोनों ही राजनीतिक दलों ने स्वयं को आनासागर का सबसे बड़ा हमदर्द बताया। लेकिन सवाल उता है कि क्या अजमेर बंद और सफाई अभियान के बाद आनासागर के हालात सुधर जाएंगे? आनासागर की दुर्दशा के लिए भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराती है। यह तब है जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में आनासागर के संरक्षण पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च हो गया। इतनी राशि खर्च होने के बाद भी आनासागर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जिस आनासागर की भराव क्षमता 16 फीट थी, उसे घटाकर 13 फीट कर दिया गया। और बरसात से पूर्व आनासागर का जलस्तर प्रतिवर्ष 10 फीट कर दिया जाता है। प्रतिवर्ष आनासागर में मछलियां मरती है। गत तीन वर्षों से मछली निकालने का ठेका भी नहीं दिया जा रहा। लाख कोशिश के बाद भी कुछ नालों का गंदा पानी आनासागर में गिर रहा है, जिसकी वजह से चारों तरफ दुर्गंध का माहौल है। अजमेर की जनता यह सवाल कर रही है कि आखिर आनासागर के हालात कब सुधरेंगे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

23 जुलाई को अजमेर बंद करवाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं। जोर जबरदस्ती की तो पुलिस सख्त कार्यवाही करेगी। अधिकांश व्यापारिक संगठनों का भी सहयोग नहीं। आनासागर के संरक्षण के लिए भाजपा ने स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान चलाया। ================= आनासागर की दुर्दशा के विरोध में कांग्रेस ने 23 जुलाई को अजमेर बंद का आह्वान किया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस के कार्यकर्ता बंद को सफल बनाने की रणनीति बना रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के लिए अजमेर बंद करना आसान नहीं है। बंद को लेकर 21 जुलाई को एक रैली निकाली गई, लेकिन इस रैली में कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत कम थी। यानी यह रैली बंद का माहौल बनाने में सफल नहीं रही। कोई भी बंद तब सफल होता है, जब व्यापारिक संगठन बंद में शामिल होने की घोषणा करते हैं, लेकिन कांग्रेस के बंद को अजमेर के अधिकांश व्यापारिक संगठनों ने समर्थन नहीं दिया है। इससे भी बंद का माहौल नहीं बन पा रहा है। बंद सफल होने का एक कारण डर और भय भी होता है। यानी डंडों के जोर पर बंद करवाया जाता है। चूंकि प्रदेश में इस समय भाजपा का शासन है, इसलिए पुलिस ने भी बंद से निपटने को लेकर तैयारियां की है। पुलिस किसी भी कांग्रेसी को जोर जबरदस्ती नहीं करने देगी। यानी किसी कांग्रेसी ने कानून हाथ में लेकर बंद करवाया तो उसके खिलाफ पुलिस सख्त कार्यवाही करेगी। वहीं शहर अध्यक्ष डॉ. जयपाल ने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से बंद करवाएंगे। उन्होंने कहा कि शासन के दबाव में कारण व्यापारिक संगठन कांग्रेस के बंद का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन आनासागर की दुर्दशा से अजमेर का आम नागरिक आक्रोशित है। डॉ. जयपाल ने कहा कि लोग स्वेच्छा से ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां दी जा रही है। भाजपा का स्वच्छता अभियान: कांग्रेस के बंद के मद्देनजर अजमेर में भाजपा ने तीन दिवसीय स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान की शुरुआत 22 जुलाई से की है। शहर भाजपा के जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने बताया कि इसके अंतर्गत भाजपा के कार्यकर्ता आनासागर में सफाई का काम करेंगे। यह काम सेवा की भावना और आनासागर के संरक्षण के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी के अभाव में मछलियों के मरने की जो घटना हुई, उसमें अब लगातार सुधार हो रहा है। निगम प्रशासन ने मृत मछलियों को तत्काल हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया है। 22 जुलाई को अजमेर में मानसून की पहली अच्छी बरसात भी हो गई है। बरसात का पानी आने के साथ ही मछलियों के मरने की समस्या स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

खरगे के जन्मदिन पर बधाई देने के बहाने धोखे से राहुल और प्रियंका गांधी पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रतिपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर बैठे राहुल गांधी के यह आचरण उचित है? कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में अराजक तत्व शामिल। ================= 21 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनकी बहन सांसद प्रियंका गांधी ने जिस तरीके से धरना दिया उसे धोखा ही कहा जाएगा। प्रधानमंत्री का सरकारी आवास अति सुरक्षा घेरे में रहता है, इसलिए कोई सामान्य नागरिक पीएम हाउस के आसपास भी नहीं पहुंच सकता। पीएम हाउस से पांच सौ मीटर की दूरी पर ही राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े का सरकारी आवास भी है। 21 जुलाई को खरगे का 84वां जन्मदिन रहा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जन्मदिन की बधाई देने के लिए खरगे के सरकारी आवास पर पहुंचे। यह एक सामान्य शिष्टाचार था, इसलिए किसी ने भी यह उम्मीद नहीं जताई कि राहुल गांधी अपनी बहन के साथ पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठे जाएंगे। लेकिन राहुल गांधी ने धोखा देकर पीएम हाउस के बाहर धरना दिया। यदि राहुल गांधी घोषणा कर पीएम हाउस की ओर जाते तो उन्हें सुरक्षा बल कभी भी धरने पर नहीं बैठने देते, लेकिन राहुल गांधी ने खरगे के जन्मदिन की आड़ में जिस तरह धोखाधड़ी की वह राजनीति में उचित नहीं है। प्रतिपक्ष के नेता के नाते राहुल गांधी संवैधानिक पद पर है। क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सुरक्षा बलों के साथ धोखाधड़ी करनी चाहिए? राहुल गांधी यह सोचते हैं कि उन्हें पीएम हाउस के बाहर कुछ समय के लिए धरना देकर बहादुरी का काम किया है? लेकिन यदि राहुल गांधी सामान्य नागरिक होते और फिर पीएम हाउस के बाहर पहुंच जाते तो उन्हें पता चलता कि संविधान का कानून कितना संख्त है। राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका ने जिस तरह धरना दिया उसे संविधान के साथ धोखा ही कहा जाएगा। जहां तक राहुल गांधी को पीएम हाउस के बाहर जबरन उठाने और फिर थाने ले जाने का सवाल है तो कानून ने अपना काम किया है। अच्छा होता कि राहुल गांधी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में पहले जंतर मंतर पहुंचे और फिर पीएम हाउस की ओर जाने की घोषणा करते। जब उन्हें पता चल जाता कि देश का कानून कितना सख्त है। संसद में चर्चा क्यों नहीं: केंद्र सरकार बार बार कह रही है कि संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर लीक पर चर्चा की जाए, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल संसद में चर्चा को तैयार नहीं है। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो चुका है, लेकिन विपक्ष के सांसद हंगामा कर संसद को चलने नहीं दे रहे। सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस और विपक्षी दल नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा क्यों नहीं करते? जहां तक कॉकरोच पाटी्र के आंदोलन का सवाल है तो इस आंदोलन में अराजक तत्व शामिल हो गए है जो हिंसा में विश्वास रखते हैं। 20 जुलाई के जो वीडियो सामने आए हैं, उन से पता चलता है कि अराजकतत्वों ने सुनियोजित तरीके से हिंसा की। अब छात्रों को आंदोलन तो पीछे छूट गया है और अराजक तत्वों ने आंदोलन पर अपना कब्जा कर लिया है । S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर में श्याम भक्तों ने कथावाचक किरीट भाई के प्रति जो आक्रोश दिखाया वैसा आक्रोश सनातनियों को मौलाना जरजिश के खिलाफ भी दिखाना चाहिए। किरीट भाई ने खाटू वाले श्याम बाबा का अपमान किया तो मौलाना जरजिश ने भगवान कृष्ण को पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाला मुसलमान बता दिया। स्वयं को ब्रह्म ऋषि होने का दावा करने वाले किरीट भाई ने माना कि वे अज्ञानी है। अजमेर में ब्लैक लिस्ट हुए। ================= 21 जुलाई को अजमेर के जवाहर रंगमंच पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव में अपने भक्तों को संबोधित करते हुए कथावाचक किरीट भाई ने राजस्थान के खाटू स्थित श्याम बाबा और उनके मंदिर को लेकर गलत जानकारी प्रस्तुत की। किरीट भाई ने कहा कि खाटू श्याम के स्कंध पुराण में 6 अध्याय हैं। उन्होंने खाटू श्याम को घटोत्कच का बेटा बताया। साथ ही कहा कि अग्रवाल का बेटा अग्रवाल ही होगा। राक्षस का बेटा राक्षस ही होगा। श्रीकृष्ण के साथ उनका कोई संबंध नहीं है। उसका मंदिर होना, उसकी उपासना करना, पूजा करना वेदों में वर्जित है। किरीट भाई ने कहा कि वे ब्रह्म ऋषि हैं और खाटू श्याम के मुद्दे पर किसी से शास्त्रार्थ करने को तैयार है। उन्होंने खाटू स्थिति श्याम बाबा के मंदिर जाने वाले श्याम भक्तों पर अमर्यादित टिप्पणी की। किरी भाई के इस कथन के बारे में पता चलते ही अजमेर के श्याम भक्त और सुप्रसिद्ध श्याम भजन गायक विमल गर्ग के नेतृत्व में गोपाल गोयल, सौरभ जैन, उमेश गर्ग, नीतेश बिंदल, नितेश अग्रवाल आदि बड़ी संख्या में श्याम भक्त वैशाली नगर स्थित होटल मानसिंह पर पहुंच गए। यही पर किरीट भाई ठहरे हुए थे। श्याम भक्तों ने किरीट भाई से कहा कि यदि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी तो उन्हें अजमेर से जाने नहीं दिया जाएगा। श्याम भक्तों के आक्रोश को देखते हुए किरीट भाई के होटल के पोर्च में खड़े होकर मीडिया के कैमरों के सामने माफी मांगी। जो किरीट भाई कुछ घंटों पहले श्याम बाबा के वजूद और धार्मिक महत्व को नकार रहे थे, उन्होंने कहा कि अज्ञानता और जानकारी के अभाव में मैंने श्याम बाबा के बारे में जो बोला उसके लिए माफी चाहता हंू। मैं अजमेर के ही नहीं बल्कि देश दुनिया के श्याम भक्तों से अपने कृत्य के लिए माफी चाहता हंू। उन्होंने कहा कि मैं श्याम बाबा के चरणों में सिर रखकर माफी मांगता हंू। भविष्य में ऐसी गलती नहीं करुंगा। यदि मेरे कथन से किसी को ठेस पहुंची तो मैं माफी मांग रहा हंू। यह माफी मैं किसी दबाव में नहीं बल्कि दिमाग और दिल से मांग रहा हंू। मुझे श्याम बाबा के बारे में ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। सार्वजनिक माफी के बाद श्याम भक्तों ने किरीट भाई को अजमेर से जाने दिया, लेकिन अजमेर में प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में किरीट भाई को आमंति करने वाले तुलसी सेवा संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश मंगल, सचिव डॉ. विष्णु चौधरी, रमेश अग्रवाल, विष्णु गर्ग, नरेंद्र खंडेलवाल, गिरधारी मंगल, कैलाश खंडेलवाल, अशोक टांक आदि ने कहा कि वे अब भविष्य में किरीट भाई का अजमेर में कोई कार्यक्रम नहीं करेंगे। उनके लिए श्याम भक्तों का सम्मान पहले हैं और वे खुद भी श्याम भक्त है। अजमेर में हुए हंगामे के बाद 21 जुलाई को ही किशनगढ़ और जयपुर में होने वाले किरीट भाई के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। वहीं खाटू स्थित श्री श्याम मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मोहन दास महाराज ने कहा कि किरीट भाई की माफी तभी स्वीकार होगी, जब वे खाटू स्थित मंदिर में आकर श्याम बाबा से माफी मांगेंगे। यदि किरीट भाई मंदिर में आकर माफी नहीं मांगते हैं तो पूरे देश में किरीट भाई का बहिष्कार करवाया जाएगा। अजमेर में हुए हंगामे के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9214071182 पर भजन गायक विमल गर्ग से ली जा सकती है। किरीट भाई का माफी मांगने वाला वीडियो मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। मौलाना जरजिश के खिलाफ भी हो आक्रोश: श्याम भक्तों ने अजमेर मं कथा वाचक किरीट भाई के प्रति जो आक्रोश दिखाया वैसा आक्रोश मौलाना जरजिश अंसारी के प्रति भी दिखाने की जरूरत हैं। किरीट भाई की तरह ही मौलाना अंसारी ने गत दिनों झारखंड में एक जलसे को संबोधित करते हुए, भगवान कृष्ण को पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाला मुसलमान बता दिया। उन्होंने कृष्ण और अर्जुन के बीच युद्ध के संवाद की व्याख्या करते हुए कहा कि कृष्ण तो मुसलमान थे। मौलाना के इस बयान के बाद सनातन धर्म के विद्वान टीवी चैनलों पर बैठकर आलोचना कर रहे हैं, लेकिन किसी भी सनातनी ने मौलाना अंसारी के प्रति अजमेर में हुए किरीट भाई के खिलाफ जैसा आक्रोश प्रकट नहीं किया है। किरीट भाई ने तो श्याम भक्तों से माफी मांग ली है, लेकिन मौलाना अंसारी ने अभी तक भी खेद नहीं जताया है। यह बात अलग है कि सनातन धर्म पांच हजार वर्ष पहले का है, जब इस्लाम का कोई वजूद नहीं था। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511